राष्ट्र गर्व गीत

जब-जब धर्म के ध्वज लहरेंगे
जब-जब शून्य के राज़ खुलेंगे
जब मिट्टी पर मरनेवालों के
इतिहासों में आवाज़ गूंजेंगे ;
स्वर्ग हो या नर्क के वासी लग जाएंगी सबको प्रीत यहां,
कह दे भारत अपनी गाथा तो बन जाता संगीत यहां ।
जय भारती ! जय भारती !!
जय भारती ! जय भारती !!

जब-जब परम-अणु के जड़ को देखा जाएगा,
कणाद वाली उस परंपरा का दृश्य उभर आएगा।
जब गणित की पृष्ठभूमि पर सूक्ष्म दशमलव आएंगे,
जब नारीशक्ति की मिसाल का मनु-रूप नज़र आएगा
गुणगान करन में कलमकार के जाएंगे जीवन बीत यहां,
कह दे भारत अपनी गाथा तो बन जाता संगीत यहां ।
जय भारती ! जय भारती !!
जय भारती ! जय भारती !!

– एस हिन्दुस्तानी

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