“माँ की ममता”

माँ की ममता
देखु में खुदा को क्या,माँ में खुदा समाया।
माँ की मूरत में दिखता,कुल संसार समाया।

छाया माँ के आँचल की ,मिलती किश्मत वालो को।
माँ की ममता क्या होती,पुछो तूम माँ वालो को।
गीले से उठाकर हमको,सूखे में स्थान दिया।
हमको तो पिला के अमृत,स्वयं विष का पान किया।
माँ की इस ममता का ,ऋणी आज संसार।
महेश अनंत ममता माँ की,प्रणाम है इनको बारम्बार।

Mk verma

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