नव वर्ष

इस नव वर्ष के स्वागत को,

धरती के प्राणी उत्सुक है।

आ जाओ अब तुम आ जाओ,

हम कब से पंथ निहार रहे।

 

शिशिर ऋतु की शीतलता,

बह रही है मंद सुगंध यहां।

इस नूतन वर्ष आगमन पर ,

हम भी कुछ नई प्रतिज्ञा लें।

 

स्नेह प्यार के बंधन में ,

जन्मो जन्मो तक बंधे रहे।

सुख में दुख में हर मौसम में ,

स्नेह सदा यू बना रहे ।

 

जाती पाती और संप्रदाय,

सब मतभेदों को भूले हम।

धरती पर रामराज्य आए ,

हम एक सूत्र में बंध जाएं।

सभी नयी प्रविष्टिया इमेल में प्राप्त करे ! सब्सक्राइब करे.

Leave a Reply