कविता :- राजनीति

कविता :- (राजनीति)

राजनीति का असर तो देखो,
जनता का बँटवारा हो गया,
भाजपा हिन्दू हो गई,
मुसलमां कांग्रेस हो गया,
बदली सोच, बदले विचार,
बदल गया देश का अखंड आकार,
बेरोजगार,किसान और मजदूर वर्ग तीनों की हालत हो गई बेकार,
जैसे मानों ढाक के तीन पात,
चुनाव के समय नेताओं के देखो कमाल,
भाषण देते समय कर देते हैं तिल का ताड़,
बाबरी मस्जिद,राम मंदिर बनवाने का करते हैं ऐलान,
फिर’लकीर का फकीर’बन कर हम करते हैं मतदान,
राजनीति गिरगिट की तरह रंग बदलती है,
लेकिन ये बात जनता कहाँ समझती है?
एक वर्ष बाद सुशासन लगने लगता है कुशासन,
अब तो भैया झेलना पड़ेगा पाँच वर्ष दुश्शासन,
फिर तो निम्न उक्ति चरित्रार्थ होगी-
बोए पेड़ बबूल का तो आम कहां ते होय…..

-ताहिर हुसैन(युवा-कवि)
बूँटोली,अलवर(राजस्थान)

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