Shahid Bhagat Singh History Infographics In Hindi – शहीद भगत सिंह की जीवनी इन्फोग्रफिक्स हिंदी में

Shahid Bhagat Singh History Infographics In Hindi – शहीद भगत सिंह की जीवनी इन्फोग्रफिक्स हिंदी में

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इन्कलाब जिंदाबाद

बोलतेचित्र

प्रस्तुत करते है

भगत सिंह

एक जीवनी
इन्फोग्रफिक्स – घटनाक्रम

“खुशबू बनके महका करेंगे हम लहलहाती हर फसलों में,
साँस बन के हम गुनगुनायेंगे आने वाली हर नस्लों में.”

भगत सिंह

१७ या २८ सितम्बर १९०७ – २३ मार्च १९३

भारत के एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी. देश की आज़ादी के लिए जिस साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला किया, वह आज के युवकों के लिए एक बहुत बड़ा आदर्श. केन्द्रीय संसद (सेण्ट्रल असेम्बली) में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया. फलस्वरूप इन्हें २३ मार्च १९३१ को इनके दो अन्य साथियों, राजगुरु तथा सुखदेव के साथ फाँसी पर लटका दिया गया. पहले लाहौर में साण्डर्स-वध और उसके बाद दिल्ली की केन्द्रीय असेम्बली में चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ बम-विस्फोट करके ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह को बुलन्दी प्रदान की. इन सभी बम धमाको के लिए उन्होंने वीर सावरकर के क्रांतिदल अभिनव भारत की भी सहायता ली और इसी दल से बम बनाने के गुर सीखे.

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१७ या २८ सितम्बर १९०७
एक बच्चे ने अपनी आँखे खोली, माता-पिता ने उसका नाम ‘भगत’ दिया.

अप्रैल १९१९
किशोर भगत सिंह पहली बार जलियावाला बाग़ गए. क्रांति के बीज पड़े.

सितम्बर १९२०
महात्मा गाँधी ने देश “असहयोग आन्दोलन” का आह्वान किया. भगत सिंह ने हिस्सा लिया.

अप्रैल १९२३
नेशनल कालेज, लाहौर में दाखिला लिया.सुखदेव थापर, बटुकेश्वर दत्त, शिव वर्मा से वहा जान पहचान हुई.

अप्रैल १९२४
एचआरऐ के संपर्क में आये; बाद में एचएसआरऐ (हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन) से जुड़े. चंद्रशेखर आज़ाद और रामप्रसाद बिस्मिल जैसो से जान पहचान हुई.

मार्च १९२६
सेवा, त्याग, करुणा का उद्देश्य लेकर नौजवान भारत सभा की सथापना की.

१९२६ से १९२७
अपने उपनाम: विरोधी से ‘प्रताप’ और ‘कीर्ति’ जैसे पत्रों में लेख लिखने लगे जिनसे क्रांति की मशाल जलने लगी.

29 मई १९२७
पहली बार बम धमाके के गलत आरोप में गिरफ्तार हुए. ६०००० की जमानत दे कर रिहा हुए.

17 दिसंबर १९२6
लाला लाजपत राय की शहादत का बदला लेने के लिए जे. पी सौन्ड़ेर्स को गोली मारी.

9 अप्रैल १९२९
ट्रेड डिस्प्यूट कानून के खिलाफ विरोध दर्शाने के लिए संसद में दो बम फोड़े जो घातक नहीं थे. तुरंत ही इन्कलाब जिंदाबाद नारे के साथ समर्पण कर दिया.

6 जून १९२९
मौत की सजा सुनाई गयी, हँसते हँसते स्वीकार की.

2 जुलाई १९२९
अंग्रेजो के घुटने टेकने से पहले 63 दिनों तक चला आमरण अनशन जेल में शुरू किया. वहा की बदत्तर कैदियों हालत के खिलाफ.

7 अक्टूबर १९३०
सांडर्स क़त्ल के केस में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को मौत की सजा सुनाई गयी.

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23 मार्च १९३१
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी के तख्ते पर लटका दिया गया और उनके मृत शरीरों को सतलुज नदी के किनारे
टुकड़ों में काट दिया गया.

मार्च १९३१ से आज तक
सरकार द्वारा उपेक्षित, पर करोडो युवा भारतियों के दिल में आज भी जिन्दा.

हम शहीद भगत सिंह की पुण्यात्मा को आज के दिन शत-शत नमन करते है.

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