बेटी दिवस के अवसर पर बेटियों की कविताएँ | Poem On Daughter In Hindi For Dauther’s Day

बेटी दिवस पर कविताएँ | Poem On Daughter In Hindi For Dauther’s Day

भारत सरकार ने एक मुहीम शुरू की सभी सोशल मीडिया पे बेटी दिवस मनाने के लिए, भारत सरकार इस सप्ताह देश की सभी बहुओं, पोतियों और रविवार के दिन बेटी दिवस मनाने जा रही है.

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Quote 1 – Poem On Daughter In Hindi For Dauther’s Day

बेटी दिवस के अवसर पर बेटियों की कविताएँ | Poem On Daughter In Hindi For Dauther's Day images

हिंदी में :

आज जब मैं जहां में आयी तो क्यों इंतेजार था किसी और का.
क्यों आते ही सताने लगा एक डर का एहसास तुम्हें माँ.
नारी के जन्म का अभिमान करो.
धरा की तरह सहती है कष्टों की बुनियाद.
फिर भी बस खुशियाँ ही तो लुटाती है नारी.
तो किस बात का अफ़सोस माँ.
एक दिन होके बड़ी पापा तुम्हारा सहारा बनूंगी.
बेटों से भी बढ़के मझदार में किनारा बनूँगी.
तो क्यों उदास हो पापा.
कितनी छोटी हूँ हाथों में तो उठाओ.
गले से लगाके मुस्कुराओ न माँ.
क्यों नारी ही अस्तित्व तलाशती है माँ.
क्या बेजान जिस्म है मेरा या सम्बेदना से दूर हूँ मैं.
जो हर बार गाल पे तमाचा सहती हूँ माँ.
क्यों पिता का कन्धा झुका सा रहता है.
क्यों नहीँ मुझपे भी फक्र होता है.
क्या कुछ अर्थ नहीँ मेरे जीवन का.
अनपूर्णा कहते हैं पर भूख मेरी ही अधूरी रह जाती है.
रातों को क्यों नहीँ कोई माथा सहलाता है मेरा.क्यों खफा होने पर मुझे कोई मनाता नहीँ.
फूल चढ़ाते हैं देवी पर.पर घर की देवी क्यों हर वक़्त तिरस्कृत रहती है माँ.
क्या आज मेरा ये मांगना गलत है की आज जब मैं जहां में आयी तो क्यों इंतेजार था
किसी और का.क्या कभी मेरे आने पर भी खुशियाँ मनायी जाएँगी?बेटी दिवस

In Hinglish or
Phonetic :

Aaj jab main aai to kyon intezar tha kisi aur ka
Kyon aate hi drane lga ek dar ka ehsas tumhe maa
Nari k janam ka abhimaan kro
Dhra ki trh shti hai kashton ki buniyad
Fir bhi bas khushiya hi lotati hai nari
Too kis bat ka afsos maa
Ek din ho ke badi papa aapka shara banugi
Beto se bad k mjhdhar me kinara banugi
To kyon udas ho papa
Kitni choti hu hathon main to uthao
Gale se lga k muskrao na maa
Kyon nari hi aastitav tlashti hai maa
Kya bejaan jism hai mera samvedbna se dur hoon mein
Jo har bar gaal pe tamacha sheti hoon maa
Kyon pita ka kandha jhuka sa rhta hai
Kyon nai mujpe bhi fkr hota
Kyon kuch arth nai mere jivan ka
Anpurna khte hai par bhukh meri adhuri rh jati hai
Raton ko koi kyu ni mata shlata mera khfa hone par muje koi manata nai
Fhul chdte hai devi par par ghr ki devi ku har vakat tirskrit rhti hai maa
Kyon mera aaj yeh mangna galt hai ki aaj jab mein jhan mein aayi to kyon intezar tha
Kisi aur ka kya kabhi mere ane par bhi khushiyan manai jayegiDauther's Day

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