हिमाद्रि तुंग श्रृंग से – जयशंकर प्रसाद हिंदी कविता | The sacred motherland – JaiShankar Prasad Hindi Poem

BolteChitra 2 – हिमाद्रि तुंग श्रृंग से – जयशंकर प्रसाद | The sacred motherland – JaiShankar Prasad

हिमाद्रि तुंग श्रृंग से - जयशंकर प्रसाद हिंदी कविता | The sacred motherland - JaiShankar Prasad Hindi Poem images

हिंदी में :

अर्मत्य वीर पुत्र हो
दृढ़ प्रतिज्ञ सोच लो
प्रशस्त पुण्य पंथ है
बढ़े चलो बढ़े चलो!

अर्मत्य = अजर अमर. प्रशस्त = सराहनीय.जयशंकर प्रसाद

In English :

Immortal brave son that you are
think hard
The road you have taken is a holy one
march on march on!JaiShankar Prasad

In Hinglish or
Phonetic :

Amartya veer putra ho
dridh pratigya soch lo
prashasta punya panth hai
badhe chalo-badhe chalo

Armaty = ajar amar. Prashast = saraahaneey.JaiShankar Prasad

निवेदन :

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