शीशों का मसीहा कोई नहीं – फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ | Shishon ka masiha koi nahin – Faiz Ahmad Faiz

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शीशों का मसीहा कोई नहीं - फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ | Shishon ka masiha koi nahin - Faiz Ahmad Faiz images

हिंदी में :

ये रंगीं रेज़े हैं शायद
उन शोख़ बिलोरीं सपनों के
तुम मस्त जवानी में जिन से
ख़ल्वत को सजाया करते थे
नादारी दफ़्तर भूक और ग़म
उन सपनों से टकराते रहे
बे-रहम था चौमुख पथराओ
ये काँच के ढाँचे क्या करते

रेज़े = कण, बिलोरीं = एक प्रकार का पत्थर, ख़ल्वत = सेवानिवृत्ति, अवकाश, शांति के क्षण, नादारी = गरीबीफ़ैज़ अहमद फ़ैज़

In Hinglish or
Phonetic :

Ye rngeen rezae hain shaayad
un shokha biloreen sapanon ke
tum mast javaanee men jin se
khalvat ko sajaayaa karate the
naadaaree daphatar bhook aur gam
un sapanon se ṭakaraate rahe
be-raham thaa chaumukh patharaa_o
ye kaanch ke ḍhaanche kyaa karate

rezae = kaṇa, biloreen = ek prakaar kaa patthar, khalvat = sevaanivritti, avakaash, shaanti ke kṣaṇa, naadaaree = gareebeeFaiz Ahmad Faiz

निवेदन :

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